आगरा कुलश्रेष्ठ सभा का इतिहास

कुलश्रेष्ठ सभा आगरा का गठन सन् 1925 में हो गया था। जिसके अध्यक्ष श्री दीवान बहादुर रोशन लाल एवं मंत्री मुंशी लखपत राय बने। आगरा में ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले छात्रों के लिए एक बोर्डिंग हाउस की बहुत जरूरत थी। इसके लिए काफी प्रयास हुए अंत में एक बैठक बेलनगंज की एक धर्मशाला में हुई। जिसकी अध्यक्षता दीवान बहादुर रोशन लाल जी ने की जिसमें श्री पुन्नी लाल जी पटवारी भोगी पुरा ने पटवारियां स्कूल से लगा हुआ एक भूखंड कुलश्रेष्ठ सभा आगरा को दान में देने के लिए श्री गया प्रसाद जी (भोगीपुरा के जमींदार) को राजी कर लिया। आगरा की बैठक में श्री पुन्नी लाल जी ने बताया कि उनके पास एकत्रित जमीन एवं धन बोर्डिंग हाउस के निर्माण के लिए दान में दे दिया जाएगा। बोर्डिंग हाउस की जमीन श्री गया प्रसाद जी ने कुलश्रेष्ठ समाज को दान में दे दी। लगभग ₹800 भोगीपुरा एवं ₹700 इस सभा का था, बाकी चंदा वसूली कर ₹5000 इस शुभ कार्य के लिए जमा किए गए। चंदा वसूली में श्री कुंज बिहारी लाल जी, श्री बद्री प्रसाद जी(गोकुलपुरा ), श्री सोहनलाल, श्री डोरी लाल ,श्री श्यो प्रसाद जी, श्री अशर्फीलाल एवं समाज के अन्य गणमान्यों की मदद से काम हुआ। अंत में कुलश्रेष्ठ समाज के प्रयासों से एक बोर्डिंग हाउस बन सका। इस कार्य को संपन्न कराने में बहुत कठिनाइयां आई। इस बोर्डिंग हाउस के बनने से कुलश्रेष्ठ समाज के नवयुवकों को कई वर्षों तक इसका पूर्ण लाभ प्राप्त हुआ। इसी परिसर में बाद में चित्रगुप्त उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की स्थापना 1969 में एवं चित्रगुप्त बाल मंदिर की स्थापना 1972 में की गई। आज भी कुलश्रेष्ठ सभा भवन परिसर में दोनों विद्यालय सुचारू रूप से चल रहे हैं।

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